Categories: लेख

सशस्त्र सेना झंडा दिवस: वीरों के सम्मान और हमारे कर्तव्य का राष्ट्रीय उत्सव

✍️ नवनीत मिश्र

हर वर्ष 7 दिसंबर को मनाया जाने वाला सशस्त्र सेना झंडा दिवस केवल एक प्रतीकात्मक आयोजन नहीं, बल्कि हमारे राष्ट्रीय चरित्र, कृतज्ञता और सैनिकों के प्रति अटूट सम्मान का दिवस है। यह दिन हमें स्मरण कराता है कि सीमाओं पर तैनात सैनिकों का साहस और त्याग ही वह सुरक्षा कवच है, जिसकी बदौलत देश शांति, स्थिरता और विश्वास के साथ आगे बढ़ता है।
हम अक्सर युद्धभूमि पर हुए बलिदानों को याद करते हैं, लेकिन इस दिन सैनिकों के परिवारों के मौन संघर्ष को भी उतने ही सम्मान के साथ स्वीकार करना चाहिए। एक सैनिक जब सीमा पर तैनात होता है, तब उसका परिवार हर दिन एक अदृश्य युद्ध लड़ता हैl प्रतीक्षा, चिंता और अनिश्चितताओं को धैर्य के साथ झेलता है। झंडा दिवस इस मौन त्याग को पहचान देने का अवसर है।
भारतीय सशस्त्र बल, सेना, नौसेना और वायुसेना, विश्व की श्रेष्ठ सेनाओं में से हैं। कठिन पर्वतीय क्षेत्रों से लेकर रेगिस्तानों तक, समुद्री सीमाओं से लेकर आकाशीय सुरक्षा तक, भारतीय सैनिक हर परिस्थिति में अपनी निष्ठा और पराक्रम के लिए जाने जाते हैं। वे केवल सीमाओं की रक्षा ही नहीं करते, बल्कि आपदाओं के समय देश को सबसे पहले संभालने वाले हाथ भी वही होते हैं।
झंडा दिवस का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इस दिन एकत्र की गई धनराशि युद्ध में घायल हुए सैनिकों के पुनर्वास, शहीदों के परिवारों, रिटायर्ड सैनिकों और उनके बच्चों की शिक्षा जैसे कल्याणकारी कार्यों पर खर्च की जाती है। यह केवल सहायता नहीं, बल्कि राष्ट्र की अपनी सेना के प्रति जिम्मेदारी का निर्वहन है।
आज भारत तेजी से आत्मनिर्भर रक्षा व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। आधुनिक तकनीक, उन्नत हथियारों और सीमा सुरक्षा के नए मानकों के केंद्र में सैनिक ही है। उसके मनोबल को सशक्त बनाना किसी भी राष्ट्र का प्राथमिक कर्तव्य है, और झंडा दिवस इसी कर्तव्य को सामूहिक रूप से निभाने का अवसर देता है।
झंडा दिवस को हम केवल कैलेंडर की एक तारीख न मानें। यह वह अवसर है जब हम सक्रिय रूप से योगदान देकर, जागरूकता फैलाकर और शहीद परिवारों के प्रति संवेदनशील होकर अपनी जिम्मेदारी निभा सकते हैं। राष्ट्र के विकास का मार्ग तभी सुरक्षित है, जब उनके प्रहरी, हमारे सैनिक, सुरक्षित, सम्मानित और समर्थ हों।
अंततः यह दिन हमें यह याद दिलाता है कि हमारी स्वतंत्रता, हमारा आज और हमारा भविष्य उन वीरों की देन है जो सीमाओं पर खड़े होकर हर खतरे को अपने साहस से रोकते हैं। सशस्त्र सेना झंडा दिवस केवल सम्मान का नहीं, बल्कि हमारे सामूहिक राष्ट्रीय कर्तव्य का उत्सव हैl उनके लिए, जिनकी वजह से यह देश सुरक्षित है।

Karan Pandey

Recent Posts

औरैया में गौशाला की लापरवाही उजागर, जिलाधिकारी ने लिया सख्त एक्शन

औरैया,(राष्ट्र की परम्परा)l जनपद औरैया के ब्लॉक एरवाकटरा स्थित ग्राम बीबीपुर की गौशाला में मृत…

2 minutes ago

बाल विवाह मुक्त भारत अभियान मऊ: स्कूलों में बच्चों

मऊ।(राष्ट्र की परम्परा)देश को बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति से मुक्त करने के उद्देश्य से…

52 minutes ago

मृतक के परिजनों की मांगो को लेकर सपाइयो ने एस डी एम को सौपा ज्ञापन

बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)बुधवार को सैकड़ो की संख्या मे सपा कार्यकर्ताओ ने आमजनमानस के साथ सपा…

1 hour ago

मिशन शक्ति फेज-5.0 देवरिया: स्कूलों से बाजार तक महिलाओं को सुरक्षा का भरोसा

देवरिया।(राष्ट्र की परम्परा)मिशन शक्ति फेज-5.0 देवरिया के अंतर्गत महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान और…

1 hour ago

कुशीनगर सदर तहसील में महिला जनसुनवाई, 40 मामलों की हुई सुनवाई

कुशीनगर।(राष्ट्र की परम्परा)प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ होने वाले उत्पीड़न की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश…

1 hour ago

मऊ में इंसानियत शर्मसार: बहू ने आशिकों से कराई ससुर की हत्या, पुलिस ने अभियुक्तों को किया गिरफ्तार

मऊ( राष्ट्र की परम्परा )जनपद मऊ से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाला सनसनीखेज मामला…

1 hour ago