आस्था के आयोजनों में व्यवस्थाओं की परीक्षा: श्रद्धालुओं की सुविधा क्यों है जरूरी

माघ व मौनी अमावस्या पर आस्था का महासंगम: नारायणी नहर का बल्लो धाम और सरयू तट बने श्रद्धा के केंद्र, व्यवस्थाओं पर उठे सवाल


महराजगंज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। माघ अमावस्या और मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर पूर्वांचल के प्रमुख तीर्थ स्थलों—महराजगंज जनपद स्थित नारायणी शाखा नहर का प्रसिद्ध बल्लो धाम तथा देवरिया जनपद के भागलपुर क्षेत्र का सरयू नदी तट—पर आस्था और विश्वास का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। ठंड और घने कोहरे के बावजूद श्रद्धालुओं का जनसैलाब अलसुबह से ही उमड़ पड़ा। हजारों श्रद्धालुओं ने पवित्र जल में स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित किया और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।

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बल्लो धाम पर सुबह चार बजे से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। हर-हर गंगे, जय नारायणी मैया जैसे जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा। महिलाओं, पुरुषों, बुजुर्गों और बच्चों ने श्रद्धा भाव से स्नान कर दीपदान, तिल-दान, अन्नदान तथा ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा दी। धार्मिक मान्यता है कि माघ अमावस्या पर पवित्र जल में स्नान करने से पापों का नाश होता है और जीवन में शांति व सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। स्थानीय ग्रामीणों और स्वयंसेवकों ने भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा और साफ-सफाई में सराहनीय भूमिका निभाई, जिससे कोई बड़ी अव्यवस्था नहीं हुई।

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वहीं देवरिया जनपद के मईल थाना क्षेत्र अंतर्गत कालीचरण घाट सहित सरयू नदी के विभिन्न घाटों पर मौनी अमावस्या के अवसर पर सैकड़ों श्रद्धालु मौन व्रत धारण कर स्नान-ध्यान में लीन दिखे। मान्यता है कि मौनी अमावस्या पर मौन रहकर गंगा या सरयू में स्नान करने से आत्मशुद्धि होती है और विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। प्रशासन द्वारा सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण की व्यवस्था तो रही, लेकिन महिलाओं के लिए वस्त्र बदलने, शौचालय और विश्राम जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव साफ नजर आया।
श्रद्धालु महिलाओं ने बताया कि किसी भी स्तर पर अस्थायी व्यवस्था नहीं की गई, जिससे उन्हें भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। बलिया, देवरसिया और छित्तूपुर जैसे अन्य घाटों पर भी स्थिति लगभग समान रही। श्रद्धालुओं ने प्रशासन से मांग की कि भविष्य में ऐसे बड़े धार्मिक आयोजनों पर महिलाओं की सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाए।

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इन दोनों आयोजनों ने एक ओर भारतीय संस्कृति, आस्था और सामाजिक एकता की जीवंत तस्वीर पेश की, तो दूसरी ओर व्यवस्थागत कमियों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। यह आवश्यक है कि आस्था के साथ-साथ सुविधाओं का भी समुचित ध्यान रखा जाए, ताकि हर श्रद्धालु बिना असुविधा के धार्मिक अनुष्ठान कर सके।

Editor CP pandey

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