केवीके पर क्षमता परियोजना के अंतर्गत कृषि निवेश वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया

कार्यक्रम में केन्द्र के पूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ के एम सिंह मुख्य अथिति के रूप में उपस्थित रहे

बहराइच (राष्ट्र की परम्परा)आचार्य नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कुमारगंज, अयोध्या द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केन्द्र, नानपारा पर क्षमता परियोजना के अंतर्गत कृषि निवेश वितरण का कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कृषिकों एवं कृषक महिलाओं को सिलाई मशीन चारा मशीन तथा अनाज भंडारण के लिये टंकी (स्टोरेज बिन) का वितरण किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ एस. के. यादव द्वारा की गयी और उन्होंने बताया कि आगामी वित्तीय वर्ष में भी कृषकों की समस्याओं एवं जरूरत को देखते हुए और भी बहुत सारे कृषि निवेश वितरित किए जाएंगे जिससे कृषकों को जीवन स्तर में वृद्धि, कृषि में सुधार एवं उत्थान हो इसके लिये केन्द्र के सभी वैज्ञानिक तत्पर रहेंगे।  कार्यक्रम में केन्द्र के पूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ के एम सिंह मुख्य अथिति के रूप में उपस्थित रहे । कार्यक्रम मे डॉ सिंह ने बताया कि क्षमता परियोजना भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली द्वारा चलाई जा रही है जिसमें थारू जनजाति के कृषकों एवं महिलाओं के उत्थान, कृषि में आय दुगनी, जीवन स्तर में वृद्धि, हेतु चलाई जा रही है।
केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ शैलेन्द्र सिंह कार्यक्रम में बताया कि फसल चक्र एवं विभिन्न प्रकार की फसलों के बारे में विस्तृत चर्चा की ।क्षमता परियोजना की नोडल अधिकारी केन्द्र क़ी वैज्ञानिक रेनू आर्य ने बताया कि कुपोषण नियंत्रण हेतु पोषण वाटिका बहुत महत्वपूर्ण है महिलाएं अपने घर के आसपास की खाली पड़ी जगह में या छत में सही तरीके से फल-सब्जियों की खेती की जाए तो औसतन पांच लोगों के एक परिवार के लिए पूरे हफ़्ते की सब्जियां तैयार हो सकती हैं। पोषण वाटिका तैयार करने और इसको लेकर कई महत्वपूर्ण बातें बताईं।
केन्द्र की वैज्ञानिक डॉ हर्षिता ने बताया कि इस समय बारिश में फसलों में विभिन्न प्रकार के कीटों का प्रकोप है अतः किसान भाई अपने खेतों की उचित देखरेख अपनी फसलों को भारी नुकसान से बचा सकते हैं। कार्यक्रम के समन्वयक केंद्र के वैज्ञानिक डॉ अरुण कुमार ने बताया कि आगामी मौसम में किन नई प्रजातियों को किसान भाई ले सकें जिससे उनकी अधिक से अधिक पैदावार हो तथा आय दुगनी करने में सहायक हो ।
केन्द्र के प्रक्षेत्र प्रबंधक डॉ. एस.बी. सिंह ने बताया कि अपनी कृषि में आय दुगनी करने हेतु सहफसली खेती तथा मोटे अनाज पर भी ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। कार्यक्रम में परियोजना के अंतर्गत विकासखंड मिहिनपुरवा चयनित ग्राम रामपुरवा, बिशनापुर एवं फ़क़ीरपुरी से सुगानी देवी, मुन्नी, जगमोहन, जितेंद्र एवं श्री राम आदि को कृषि निवेश वितरित किया गया ।

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