कबाड़ से बनेगा ज्ञान का संसार, प्राथमिक में 20 तो जूनियर में 15 रुपये प्रति छात्र

शिक्षण-अधिगम सामग्री के लिए विद्यालयों को मिलेगी धनराशि
बच्चों को देखकर-छूकर और गतिविधियों से सीखने का मिलेगा मौका

बलिया (राष्ट्र की परम्परा )

परिषदीय विद्यालयों की कक्षाओं में अब सिर्फ किताब और ब्लैकबोर्ड तक पढ़ाई सीमित नहीं रहेगी। बच्चों को कठिन विषयों को आसानी से समझाने के लिए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सस्ती और उपयोगी सामग्री से शिक्षण-अधिगम सामग्री (टीएलएम) तैयार कराई जाएगी। समग्र शिक्षा के तहत वर्ष 2026-27 में इसके लिए छात्र संख्या के आधार पर विद्यालयों को धनराशि दी जाएगी। प्राथमिक स्तर पर प्रति छात्र 20 रुपये और जूनियर स्तर पर प्रति छात्र 15 रुपये की दर से धनराशि मिलेगी।महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय की ओर से जारी निर्देश में टीएलएम के नाम पर धनराशि के अनावश्यक खर्च पर भी शिकंजा कसा गया है। स्पष्ट किया गया है कि सामग्री केवल कक्षा की सजावट या दिखावे के लिए नहीं, बल्कि बच्चों के निर्धारित अधिगम परिणाम से सीधे जुड़ी होनी चाहिए। शिक्षक पाठ्यवस्तु के अनुसार सामग्री की पहचान कर उसका निर्माण करेंगे। सामग्री ऐसी हो, जिसका सभी बच्चे उपयोग कर सकें और उसे सुरक्षित रखने के लिए विद्यालय में निश्चित स्थान भी बनाया जाए। वर्णमाला से ग्लोब तक, कक्षा बनेगी गतिविधियों का केंद्र टीएलएम के लिए कार्ड बोर्ड, चार्ट पेपर, स्केच पेन, गोंद, अबेकस, रंग, आइसक्रीम स्टिक, धागा-ऊन, रिबन, स्ट्रॉ, रबर बैंड व टेप जैसी सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकेगा। वर्णमाला, शब्द व स्वर कार्ड, बारहखड़ी कार्ड, ग्लोब, भारत और विश्व के नक्शे, पपेट, पौधों व जानवरों के चार्ट, यातायात नियमों के चार्ट और वर्कशीट भी तैयार की जाएंगी।स्टेशनरी खरीदी तो फंसेंगे, सजावट पर भी रोक टीएलएम मद की धनराशि से पेन, पेंसिल, कापी-किताब, परीक्षा सामग्री, डस्टबिन, झाड़ू, सफाई सामग्री, सजावट का सामान, पर्दे, तौलिया, डायरी, घड़ी और मेजपोश नहीं खरीदे जा सकेंगे। कप, गिलास, जग जैसे बर्तन, फर्स्ट एड बॉक्स, साबुन, साउंड सिस्टम और ताला-चाबी पर भी खर्च प्रतिबंधित रहेगा। रेडीमेड टीएलएम की खरीद केवल अपरिहार्य स्थिति में कम कीमत पर करने के निर्देश हैं।खंड शिक्षा अधिकारी नवानगर पंकज कुमार सिंह ने बताया कि शिक्षण-अधिगम सामग्री का उद्देश्य बच्चों को गतिविधियों के माध्यम से विषय समझाना है। विद्यालयों में उपलब्ध धनराशि का उपयोग पाठ्यवस्तु और अधिगम परिणाम के अनुरूप उपयोगी सामग्री तैयार करने में किया जाएगा। स्थानीय और कम लागत वाली सामग्री के इस्तेमाल पर विशेष जोर रहेगा।

rkpNavneet Mishra

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