आसमान छूने की तैयारी! देवरिया में छात्रों ने सीखी रॉकेट लॉन्चिंग की तकनीक, मिनी रॉकेट का हुआ प्रक्षेपण
देवरिया (राष्ट्र की परम्परा ✍️)। अंतरिक्ष में रॉकेट कैसे उड़ान भरता है? हवा में पैराशूट कैसे खुलता है और वैज्ञानिक उपकरण सुरक्षित जमीन पर कैसे उतरते हैं? इन सवालों के जवाब जानने के लिए देवरिया के विद्यार्थियों को प्रयोग और तकनीक से रूबरू होने का मौका मिला। बरपार स्थित जागृति उद्यम केंद्र-पूर्वांचल के बरगद सभागार में शनिवार को आयोजित कैनसैट एवं रॉकेट्री कार्यशाला में छात्रों ने अंतरिक्ष विज्ञान, रॉकेट तकनीक और रोबोटिक्स की बारीकियां समझीं। कार्यशाला का आकर्षण लघु मॉडल रॉकेट का प्रक्षेपण रहा, जिसने विद्यार्थियों की जिज्ञासा को और बढ़ाया। कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच विकसित करना, अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाना और उन्हें आधुनिक तकनीकी नवाचारों से परिचित कराना था। विशेषज्ञों ने सरल तरीके से बताया कि रॉकेट प्रक्षेपण की प्रक्रिया कैसे काम करती है और कैनसैट के माध्यम से विभिन्न तकनीकी सिद्धांतों को किस तरह समझा जा सकता है। केआइपीएम गोरखपुर की टीम के लीडर सिद्धांश पांडेय ने कैनसैट और रॉकेट्री की तकनीकी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि रॉकेट के प्रक्षेपण से लेकर उससे जुड़े उपकरणों की कार्यप्रणाली को समझना अंतरिक्ष विज्ञान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने विद्यार्थियों को कैनसैट और रॉकेट्री प्रतियोगिताओं के बारे में भी जानकारी दी, जिससे छात्र भविष्य में इन क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा आजमा सकें। गुआवाबॉट स्टार्टअप की मुख्य कार्यकारी अधिकारी राशि गुप्ता ने रोबोटिक्स तकनीक और भविष्य में उसकी बढ़ती उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक की संभावनाओं से परिचित कराया। कार्यशाला में रॉकेट के अंतरिक्ष की ओर प्रक्षेपित होने, पैराशूट के खुलने और उपकरणों के सुरक्षित नीचे उतरने की प्रक्रिया से संबंधित वीडियो भी दिखाए गए। इससे विद्यार्थियों को जटिल तकनीकी प्रक्रियाओं को आसानी से समझने में मदद मिली। स्टार्टअप के सदस्य धीरज ने भी इस विषय पर अपने विचार साझा किए। जागृति के असिस्टेंट प्रोग्राम मैनेजर अनुराग तिवारी ने कहा कि जागृति का प्रयास विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान, रॉकेट तकनीक और कैनसैट के कार्य सिद्धांतों से परिचित कराना है। इस तरह की कार्यशालाएं विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर प्रयोगों के माध्यम से सीखने का अवसर देती हैं। इससे उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने और तकनीकी नवाचारों के प्रति रुचि पैदा करने में मदद मिलती है। कार्यशाला के दौरान जागृति उद्यम मित्र अभिनव त्रिपाठी और कल्याण ने लघु मॉडल रॉकेट का प्रक्षेपण किया। इस गतिविधि ने विद्यार्थियों को रॉकेट्री के व्यावहारिक पहलुओं को करीब से समझने का अवसर दिया। कार्यक्रम में सनबीम स्कूल के शिक्षक विंध्येश्वर, नाथ त्रिपाठी, अनामिका पांडेय, मनीष गुप्ता सहित अन्य लोग मौजूद रहे। कार्यशाला के माध्यम से विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिला कि अंतरिक्ष विज्ञान और रोबोटिक्स केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित विषय नहीं हैं, बल्कि प्रयोग, अनुसंधान और नवाचार के व्यापक अवसरों से जुड़े क्षेत्र हैं। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को विज्ञान के प्रति जिज्ञासु बनाने और भविष्य में तकनीकी क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
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