तमकुहीराज में उठेगा रॉकेट, अंतरिक्ष में छलांग लगाएंगे देशभर के 608 छात्र! 31 अक्टूबर से सजेगा ‘नारायणी रॉकेट्री कप-2026’ का मंच
देवरिया/कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)। कुशीनगर के तमकुहीराज में अब अंतरिक्ष विज्ञान का रोमांच जमीन पर उतरने जा रहा है। नारायणी नदी का तट 31 अक्टूबर से 3 नवंबर 2026 तक रॉकेट्री, आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक नवाचार का गवाह बनेगा। यहां राष्ट्रीय स्तर की ‘IN-SPACe नारायणी रॉकेट्री कप-2026’ प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी, जिसमें देशभर के विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों की 76 छात्र टीमें अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगी। आयोजन में करीब 608 छात्र और 150 शिक्षक व मेंटर शामिल होंगे। खास बात यह है कि विद्यार्थी केवल रॉकेट और उपग्रह तकनीक के बारे में पढ़ेंगे ही नहीं, बल्कि उसे व्यावहारिक रूप से समझने और तकनीकी चुनौतियों पर काम करने का अवसर भी पाएंगे। कैनसेट और मॉडल रॉकेट्री में दिखेगा दम प्रतियोगिता में 48 टीमें कैनसेट और 28 टीमें मॉडल रॉकेट्री श्रेणी में भाग लेंगी। कैनसेट छोटे उपग्रह जैसी संरचना वाला एक शैक्षणिक उपकरण होता है, जिसमें विभिन्न तकनीकी उपकरणों को समायोजित कर निर्धारित मिशन के अनुरूप प्रयोग किए जाते हैं। वहीं मॉडल रॉकेट्री के जरिए विद्यार्थियों को रॉकेट की डिजाइन, निर्माण, पेलोड और प्रक्षेपण से जुड़ी तकनीकी प्रक्रियाओं को समझने का मौका मिलेगा। छात्रों के सामने योजना बनाने, तकनीकी समस्याओं का समाधान खोजने, टीम के साथ काम करने और मिशन को सफल बनाने जैसी चुनौतियां होंगी। इस तरह प्रतियोगिता युवाओं के लिए विज्ञान की किताबों से आगे बढ़कर प्रयोग और नवाचार की दुनिया से जुड़ने का अवसर बनेगी। सांसद शशांक मणि ने बताया क्षेत्र के लिए अहम कदम देवरिया लोकसभा क्षेत्र के सांसद शशांक मणि ने आयोजन को क्षेत्र के लिए गौरवपूर्ण बताते हुए कहा कि तमकुहीराज में लगातार दूसरे वर्ष राष्ट्रीय स्तर की रॉकेट्री और कैनसेट प्रतियोगिता का आयोजन होना युवाओं के लिए महत्वपूर्ण अवसर है। इससे विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान, आधुनिक तकनीक और नवाचार को करीब से समझने का मौका मिलेगा। उन्होंने कहा कि इस पहल का लाभ केवल विद्यार्थियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। किसानों को खेती में तकनीक की उपयोगिता के प्रति जागरूक करने और ग्राम प्रधानों को गांवों के विकास में आधुनिक तकनीक की संभावनाओं से परिचित कराने में भी ऐसे आयोजन सहायक हो सकते हैं। सांसद के मुताबिक, क्षेत्र में वैज्ञानिक सोच और अंतरिक्ष के प्रति जागरूकता बढ़ाना समय की जरूरत है। युवाओं को विज्ञान, अनुसंधान और तकनीकी उद्यमिता से जोड़कर भविष्य में उनके लिए नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं। ‘अमृत प्रयास’ से विकास को नई दिशा देने की कोशिश सांसद शशांक मणि ने इस आयोजन को अपनी दस वर्षीय विकास रणनीति ‘अमृत प्रयास’ के उद्देश्यों से जुड़ा बताया। इस पहल का लक्ष्य शिक्षा, तकनीक, उद्यमिता और जनभागीदारी के माध्यम से देवरिया लोकसभा क्षेत्र के विकास को आगे बढ़ाना है। अंतरिक्ष विज्ञान जैसे आधुनिक क्षेत्रों से स्थानीय युवाओं का परिचय बढ़ने पर उनमें अनुसंधान, तकनीकी कौशल और नवाचार के प्रति रुचि विकसित हो सकती है। इससे भविष्य में क्षेत्र के विद्यार्थियों को विज्ञान और प्रौद्योगिकी से जुड़े करियर तथा उद्यमिता के नए रास्तों को समझने में मदद मिलेगी। IN-SPACe और प्रदेश सरकार का सहयोग आयोजकों के अनुसार, भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe), श्रीनारायणी साइंस डेवलपमेंट फाउंडेशन (SSDF), उत्तर प्रदेश सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और जिला प्रशासन के सहयोग से प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है। IN-SPACe के प्रमोशन निदेशालय के निदेशक एवं एएसआई के कार्यकारी सचिव डॉ. विनोद कुमार ने कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों को शुरुआती स्तर से अंतरिक्ष तकनीक से जोड़ने और वास्तविक तकनीकी चुनौतियों पर काम करने का अवसर देती हैं। इससे भविष्य के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और उद्यमियों को तैयार करने में मदद मिल सकती है। उत्तर प्रदेश सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख सचिव पंधारी यादव ने भी विज्ञान, तकनीक और नवाचार की संस्कृति को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया। उनके अनुसार, ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में अनुसंधान, नवाचार और स्टार्टअप के प्रति रुचि बढ़ाने के साथ विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित आधारित शिक्षा को मजबूती दे सकते हैं। स्थानीय क्षेत्र को भी मिल सकता है लाभ तमकुहीराज में होने वाला यह आयोजन केवल एक तकनीकी प्रतियोगिता नहीं, बल्कि पूर्वांचल के युवाओं को अंतरिक्ष विज्ञान की संभावनाओं से परिचित कराने का मंच भी है। राष्ट्रीय स्तर की छात्र टीमों की भागीदारी से क्षेत्र में विज्ञान और तकनीक को लेकर नई चर्चा शुरू होने की उम्मीद है। भारत अंतरिक्ष क्षेत्र में अपनी क्षमताओं का विस्तार कर रहा है। ऐसे में विद्यार्थियों को शुरुआती दौर से ही रॉकेट्री, पेलोड डिजाइन, मिशन प्रबंधन और तकनीकी नवाचार से जोड़ना भविष्य की जरूरतों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। 31 अक्टूबर से शुरू होने वाली इस प्रतियोगिता पर अब क्षेत्र के विज्ञान प्रेमियों, विद्यार्थियों और तकनीकी शिक्षा से जुड़े लोगों की निगाहें रहेंगी। नारायणी नदी के तट पर आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम देवरिया-कुशीनगर क्षेत्र में वैज्ञानिक जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकता है।
वाराणसी (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) गंगा के किनारे एयर शो का रोमांच देखने की तैयारी…
AI निर्मित झांसी (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। बधाई मांगने के क्षेत्र को लेकर किन्नरों के…
गोपालगंज में कोलकाता क्लासिकल होमियो क्लिनिक की चर्चा! संतान की समस्या से लेकर चर्म रोग…
सीवान (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। बिहार के सीवान जिले के जामो बाजार थाना क्षेत्र के…
पटना (राष्ट्र की परम्परा)। पटना जंक्शन स्थित प्रसिद्ध श्री महावीर मंदिर में हनुमान जी के…
SIT गठित; CCTV फुटेज खंगाल रही पुलिस हजारीबाग (राष्ट्र की परम्परा)। झारखंड हाईकोर्ट की अधिवक्ता…