चुनाव सुधार से सत्ता परिवर्तन तक पहुंची लड़ाई? प्रशांत भूषण के बयान पर BJP का तीखा पलटवार

फोटो goo

सत्ता परिवर्तन की मांग पर सियासी संग्राम तेज! BJP अध्यक्ष नितिन नवीन का विपक्ष पर बड़ा हमला, विदेशी ताकतों से मिलीभगत का लगाया आरोप

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर देश की राजनीति में नया घमासान छिड़ गया है। सत्ता परिवर्तन की मांग को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि वह विदेशी ताकतों के साथ मिलीभगत करके भारत को अस्थिर करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष की सत्ता परिवर्तन की मांग ने उसके असली एजेंडे को उजागर कर दिया है।
नितिन नवीन ने विपक्ष की मंशा पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि उसकी लड़ाई चुनाव सुधार, मतदाता सूची के पुनरीक्षण या देश के युवाओं के भविष्य के लिए नहीं है। उनके मुताबिक, विपक्ष का मकसद देश में अराजकता फैलाकर किसी भी कीमत पर सत्ता हासिल करना है। भाजपा अध्यक्ष ने स्पष्ट कहा कि लोकतंत्र में सत्ता हासिल करने का रास्ता जनता के जनादेश से होकर गुजरता है, न कि अव्यवस्था और अराजकता के जरिए।
उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा और देश की देशभक्त जनता लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने की किसी भी कोशिश को कामयाब नहीं होने देगी। उनके इस बयान के बाद SIR और सत्ता परिवर्तन का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।
दरअसल, यह विवाद सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण के उस बयान के बाद तेज हुआ, जिसमें उन्होंने कहा था कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहा आंदोलन अब सत्ता परिवर्तन की लड़ाई का रूप ले चुका है।
प्रशांत भूषण ने गुरुवार को नई दिल्ली में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके, छात्र संगठनों के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इस दौरान उन्होंने सत्ता परिवर्तन की मांग को लोकतांत्रिक अधिकारों के दायरे में बताते हुए कहा कि सरकार के खिलाफ असंतोष व्यक्त करना संविधान के तहत अपराध नहीं है।
भूषण ने कहा कि फिलहाल आंदोलन का मुख्य मुद्दा चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने का है। हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि कथित बर्बरता और अनियमितताओं का सिलसिला जारी रहा, तो सत्ता परिवर्तन की मांग और तेज हो सकती है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे सत्ता परिवर्तन चाहते हैं।
इस बयान ने राजनीतिक विवाद को और हवा दे दी है। एक ओर भाजपा विपक्ष पर देश की स्थिरता को खतरे में डालने और सत्ता हासिल करने के लिए अराजकता का सहारा लेने का आरोप लगा रही है, वहीं दूसरी ओर प्रशांत भूषण और आंदोलन से जुड़े लोगों का तर्क है कि निष्पक्ष चुनाव की मांग करना तथा सरकार के खिलाफ आवाज उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है।
SIR को लेकर उठे सवाल अब केवल मतदाता सूची की शुद्धता और चुनावी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि इनके साथ लोकतांत्रिक अधिकार, राजनीतिक जवाबदेही और सत्ता परिवर्तन जैसे मुद्दे भी जुड़ गए हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने की संभावना है।
फिलहाल, भाजपा के आरोपों और प्रशांत भूषण के बयानों के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि SIR को लेकर चल रही बहस चुनाव सुधारों की दिशा में आगे बढ़ती है या सत्ता परिवर्तन की सियासत आने वाले दिनों में और बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन जाती है।

Editor CP pandey

Recent Posts

बिना विपक्ष की सहमति परिसीमन नहीं! खड़गे का मोदी सरकार को चौथा पत्र, उठाए संवैधानिक सवाल

फोटो goo परिसीमन पर फिर आमने-सामने सरकार और विपक्ष! PM मोदी को खड़गे का चौथा…

23 minutes ago

रिश्तों में धोखा और हत्या की खौफनाक साजिश: मेरठ कोर्ट का बड़ा फैसला, पत्नी-प्रेमी को फांसी

मेरठ में रिश्तों का खौफनाक अंत! पत्नी और प्रेमी को फांसी की सजा, पति की…

1 hour ago

दिव्यांगजनों को दुकान के लिए मिलेगा 20 हजार रुपये तक का सहयोग

दुकान निर्माण और संचालन के लिए ऋण व अनुदान की सुविधा, ऑनलाइन करना होगा आवेदन…

2 hours ago

न्यायिक अधिकारी जागृति के निधन से सदमे में अधिवक्ता समुदाय, साथियों ने नम आंखों से दी श्रद्धांजलि

फाइल फोटो जागृति जी न्यायिक अधिकारी देवरिया की न्यायिक अधिकारी जागृति का निधन: एम्स गोरखपुर…

2 hours ago