अनियमित अभिकर्ताओं पर शिकंजा, जिला बचत कार्यालय मऊ में जांच प्रक्रिया सख्त

मऊ।(राष्ट्र की परम्परा)
जनपद मऊ में जिला बचत कार्यालय से जुड़े अभिकर्ताओं के कार्यों को लेकर इन दिनों प्रशासनिक सख्ती चर्चा का विषय बनी हुई है। मऊ जिला बचत अधिकारी विवाद उस समय सुर्खियों में आया जब जिला बचत अधिकारी ने अनियमित अभिकर्ताओं द्वारा दबाव बनाने, झूठी शिकायतें भेजने और सोशल मीडिया पर भ्रामक अभियान चलाने के आरोप लगाए।
जिला बचत अधिकारी डॉ. शैलेश कुमार ने स्पष्ट किया है कि अभिकर्ताओं को अनुबंध की शर्तों के तहत ही कार्य करना होगा। नियमों से हटकर किसी भी प्रकार का कार्य स्वीकार नहीं किया जाएगा, चाहे इसके लिए कितना भी दबाव क्यों न बनाया जाए।
1000 से अधिक अभिकर्ता, 500 से ज्यादा महिला एजेंट सक्रिय
जिला बचत कार्यालय के अंतर्गत जनपद मऊ में लगभग 1000 से अधिक राष्ट्रीय बचत अभिकर्ता एवं महिला प्रधान अभिकर्ता विभिन्न डाकघरों में कार्यरत हैं। इनमें 500 से अधिक सक्रिय महिला अभिकर्ता शामिल हैं, जिन्हें प्रति माह 5 से 36 खाते खोलने का लक्ष्य दिया गया है।
मऊ जिला बचत अधिकारी विवाद के बीच यह भी स्पष्ट किया गया कि सभी अभिकर्ताओं की जिम्मेदारी निवेशकों के धन की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसके लिए अनुबंध शर्तों का कड़ाई से पालन अनिवार्य है।
धन गमन की शिकायतों से बढ़ी सख्ती
डॉ. शैलेश कुमार ने बताया कि जिला बचत कार्यालय को समय-समय पर कुछ अभिकर्ताओं के विरुद्ध निवेशकों की धनराशि के गमन (मिसएप्रोप्रियेशन) की शिकायतें प्राप्त होती रही हैं।
इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने जांच प्रक्रिया को सख्त किया है। एजेंसी के नवीनीकरण से पहले अभिलेखों की गहन जांच और संपूर्ण औपचारिकताओं को पूरा किया जा रहा है।
मऊ जिला बचत अधिकारी विवाद के संदर्भ में अधिकारी ने कहा कि यदि समय रहते सख्ती न बरती जाए तो जिले की छवि को नुकसान पहुंच सकता है।
अनियमित अभिकर्ताओं पर आरोप: दबाव और षड्यंत्र
जिला बचत अधिकारी ने आरोप लगाया कि कुछ अनियमित अभिकर्ता, जिनकी एजेंसी नवीनीकरण में अनियमितताओं के कारण बाधा आ रही है, वे संगठित होकर दबाव की राजनीति कर रहे हैं।
उनका कहना है कि ये अभिकर्ता जनप्रतिनिधियों और बाहरी व्यक्तियों को साथ लेकर विभाग पर मनमुताबिक कार्य कराने का प्रयास कर रहे हैं।
मऊ जिला बचत अधिकारी विवाद में यह भी सामने आया है कि विभिन्न ऑनलाइन पोर्टलों पर हर माह शिकायतें भेजी जा रही हैं, ताकि प्रशासन पर अनावश्यक दबाव बनाया जा सके।
सोशल मीडिया पर भ्रामक अभियान का आरोप
जिला बचत अधिकारी ने कहा कि कुछ अभिकर्ता विभागीय कार्रवाई से बचने के लिए सोशल मीडिया पर झूठी और भ्रामक खबरें प्रसारित करवा रहे हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग द्वारा उठाए गए कदम निवेशकों के हित में हैं। यदि किसी अभिकर्ता द्वारा धन गमन जैसी गंभीर शिकायत पाई जाती है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
मऊ जिला बचत अधिकारी विवाद के चलते विभाग ने यह भी कहा है कि नियमों का पालन सुनिश्चित करना ही उनकी प्राथमिकता है।
बाहरी व्यक्तियों की भूमिका पर सवाल
अधिकारी ने यह भी कहा कि कुछ बाहरी व्यक्तियों द्वारा जिला बचत कार्यालय से असंबंधित होते हुए भी हस्तक्षेप की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जिला बचत कार्यालय मऊ की कार्यप्रणाली पूरी तरह नियमों और अनुबंध शर्तों पर आधारित है। किसी भी बाहरी दबाव को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
निवेशकों के हित सर्वोपरि
डॉ. शैलेश कुमार ने दोहराया कि उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी आम निवेशकों के धन की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
मऊ जिला बचत अधिकारी विवाद के बीच उन्होंने यह संदेश दिया कि जो अभिकर्ता ईमानदारी और नियमों के तहत कार्य कर रहे हैं, उन्हें किसी प्रकार की चिंता की आवश्यकता नहीं है।
लेकिन जो अभिकर्ता अनियमितता में लिप्त पाए जाएंगे, उनके विरुद्ध सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
एजेंसी नवीनीकरण की नई प्रक्रिया
जिला बचत कार्यालय ने एजेंसी नवीनीकरण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए अतिरिक्त दस्तावेजों और रिकॉर्ड सत्यापन की व्यवस्था लागू की है।
अब बिना अभिलेखों की जांच और पूर्ण औपचारिकताओं के कोई भी एजेंसी नवीनीकृत नहीं की जाएगी।
मऊ जिला बचत अधिकारी विवाद ने यह स्पष्ट कर दिया है कि विभाग नियमों से समझौता करने के मूड में नहीं है।
प्रशासन की छवि बचाने की चुनौती
अधिकारी ने कहा कि यदि अनियमितताओं पर समय रहते कार्रवाई न की जाए तो इससे न केवल विभाग बल्कि जिला प्रशासन की छवि भी धूमिल हो सकती है।
इसलिए आवश्यक है कि नियमों का पालन सख्ती से कराया जाए और किसी भी प्रकार के अनैतिक दबाव को अस्वीकार किया जाए।
निष्कर्ष: नियमों से समझौता नहीं
मऊ में जिला बचत कार्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर उत्पन्न विवाद ने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि वित्तीय लेन-देन से जुड़े विभागों में पारदर्शिता और अनुशासन कितना आवश्यक है।
मऊ जिला बचत अधिकारी विवाद के बीच प्रशासन का स्पष्ट संदेश है—अभिकर्ताओं को अनुबंध शर्तों के अधीन ही कार्य करना होगा।
निवेशकों के हितों की रक्षा और विभाग की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए उठाए गए कदमों को प्रशासनिक मजबूती के रूप में देखा जा रहा है।

rkpnews@somnath

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